डॉ. किरोडी़ लाल मीणा
डॉ. किरोड़ी लाल मीणा: संघर्ष से सत्ता के गलियारों तक का सफर
राजस्थान की राजनीति में कुछ नाम ऐसे हैं, जिनकी पहचान सिर्फ पद से नहीं बल्कि उनके संघर्ष और जनसरोकारों से बनती है। डॉ. किरोड़ी लाल मीणा उन्हीं नेताओं में से एक हैं।
राजस्थान के दौसा जिले के खोहरा मुल्ला गांव से शुरू हुआ एक साधारण किसान परिवार का सफर आगे चलकर विधानसभा, लोकसभा, राज्यसभा और राजस्थान सरकार के मंत्रिमंडल तक पहुंचा।
गांव की मिट्टी से निकला एक डॉक्टर
डॉ. किरोड़ी लाल मीणा का जन्म 3 नवंबर 1951 को दौसा जिले के खोहरा मुल्ला गांव में हुआ। ग्रामीण परिवेश में पले-बढ़े किरोड़ी लाल ने गांव और किसानों की समस्याओं को बेहद करीब से देखा।
उन्होंने चिकित्सा शिक्षा हासिल की और MBBS डॉक्टर बने। लेकिन डॉक्टर बनने के बाद भी उनका मन समाज और सार्वजनिक जीवन की ओर खिंचता चला गया।
यहीं से उनके जीवन की दिशा बदलने लगी।
संगठन से राजनीति की शुरुआत
किरोड़ी लाल मीणा ने सार्वजनिक जीवन में सक्रिय भूमिका निभानी शुरू की और संगठन के माध्यम से राजनीति में अपनी जगह बनाई।
1981 में सवाई माधोपुर भाजपा के जिला अध्यक्ष बने और इसके बाद संगठन में लगातार आगे बढ़ते गए। 1986 में भारतीय जनता युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी संभाली।
यह वह दौर था जब राजस्थान की राजनीति में उनका नाम तेजी से पहचान बनाने लगा था।
पहली बार विधानसभा पहुंचे
1985 में पहली बार राजस्थान विधानसभा के सदस्य बने।
इसके बाद उनका राजनीतिक सफर लगातार आगे बढ़ता गया। अलग-अलग चुनावों में जीत हासिल करते हुए उन्होंने राजस्थान की राजनीति में अपनी मजबूत पहचान बनाई।
विधानसभा से लेकर सरकार में मंत्री पद तक पहुंचने के साथ-साथ उन्होंने विपक्ष में रहते हुए भी अपनी सक्रिय राजनीति जारी रखी।
संसद की राजनीति में प्रवेश
राजस्थान की राजनीति में पहचान बनाने के बाद डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने राष्ट्रीय राजनीति का रुख किया।
1989 में पहली बार लोकसभा सांसद बने।
इसके बाद 2009 में दौसा से लोकसभा सांसद चुने गए। संसद में रहते हुए उन्होंने राजस्थान और विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों से जुड़े मुद्दों को उठाया।
बाद में 2018 में राजस्थान से राज्यसभा सांसद बने और राष्ट्रीय राजनीति में अपनी भूमिका निभाई।
मंत्री पद की जिम्मेदारी
डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने राजस्थान सरकार में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं।
2003 से 2008 के बीच वे राजस्थान सरकार में मंत्री रहे।
सत्ता में रहते हुए प्रशासन चलाने का अनुभव हासिल किया तो विपक्ष में रहते हुए सरकार के खिलाफ आवाज उठाने के लिए भी जाने गए।
यही कारण रहा कि समय के साथ उनकी पहचान एक ऐसे नेता के रूप में बनी जो अपनी बात खुलकर रखने के लिए जाने जाते हैं।
राजनीतिक जीवन में आया बड़ा मोड़
किरोड़ी लाल मीणा का राजनीतिक सफर हमेशा एक जैसा नहीं रहा।
2008 में उन्होंने भाजपा से अलग रास्ता अपनाया। इसके बाद उन्होंने अपनी अलग राजनीतिक राह बनाई और 2013 में नेशनल पीपल्स पार्टी के टिकट पर लालसोट से विधानसभा चुनाव जीता।
लेकिन राजनीति में परिस्थितियां बदलती रहती हैं।
2018 में उन्होंने भाजपा में वापसी की और उसी वर्ष राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए।
यह उनके राजनीतिक जीवन का एक महत्वपूर्ण मोड़ था।
2023 में फिर विधानसभा की राजनीति
लंबे राजनीतिक सफर के बाद 2023 के विधानसभा चुनाव में डॉ. किरोड़ी लाल मीणा सवाई माधोपुर से विधायक चुने गए।
इसके बाद उन्हें राजस्थान की भाजपा सरकार में कैबिनेट मंत्री की जिम्मेदारी मिली।
एक बार फिर वे राजस्थान की सक्रिय सत्ता की राजनीति के केंद्र में दिखाई दिए।
“बाबा” के नाम से अलग पहचान
राजस्थान की राजनीति में डॉ. किरोड़ी लाल मीणा को उनके समर्थक अक्सर “बाबा” के नाम से पुकारते हैं।
उनकी राजनीति की एक खास पहचान रही है—जनता के बीच जाकर अपनी बात रखना और सड़क से लेकर विधानसभा तक मुद्दों को उठाना।
पूर्वी राजस्थान में उनकी विशेष राजनीतिक पकड़ मानी जाती है और ग्रामीण एवं आदिवासी क्षेत्रों में भी उनका लंबे समय से प्रभाव रहा है।
संघर्षों से भरा रहा राजनीतिक सफर
डॉ. किरोड़ी लाल मीणा की कहानी केवल चुनाव जीतने की कहानी नहीं है।
इसमें संगठन का संघर्ष है, सत्ता का अनुभव है, विपक्ष की राजनीति है, पार्टी से दूरी है, फिर वापसी है और लगातार जनता के बीच सक्रिय रहने की कहानी है।
एक डॉक्टर से राजनेता बनने तक और फिर विधायक से सांसद तथा मंत्री बनने तक उन्होंने राजनीति के लगभग हर पड़ाव को देखा है।
आज भी जारी है सफर
चार दशक से अधिक समय के सार्वजनिक जीवन में डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने राजस्थान की राजनीति के कई दौर देखे हैं।
गांव से शुरू हुआ उनका सफर आज राजस्थान सरकार में मंत्री पद तक पहुंच चुका है।
उनके राजनीतिक जीवन में कई उपलब्धियां हैं तो कई विवाद और संघर्ष भी रहे हैं। यही उतार-चढ़ाव उनकी राजनीतिक कहानी को रोचक बनाते हैं।
गांव से सत्ता तक...
खोहरा मुल्ला की मिट्टी से निकलकर विधानसभा तक,
विधानसभा से संसद तक,
संसद से राज्यसभा तक,
और फिर राजस्थान की सत्ता के गलियारों तक—
डॉ. किरोड़ी लाल मीणा की राजनीतिक यात्रा राजस्थान की राजनीति के लंबे और संघर्षपूर्ण अध्यायों में से एक है।
उनकी कहानी अभी खत्म नहीं हुई है...
सफर जारी है।

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