डॉ. किरोडी़ लाल मीणा (बाबा)
डॉ. किरोड़ी लाल मीणा: गांव की मिट्टी से राजस्थान की राजनीति के शिखर तक का सफर
डॉ. किरोड़ी लाल मीणा राजस्थान की राजनीति का ऐसा नाम हैं, जिसकी पहचान केवल चुनावी राजनीति तक सीमित नहीं रही। एक साधारण किसान परिवार से निकलकर डॉक्टर बनना, फिर संगठन की राजनीति में कदम रखना, विधायक और सांसद बनना, केंद्र की संसद से लेकर राजस्थान सरकार तक महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाना—उनकी राजनीतिक यात्रा कई उतार-चढ़ाव और संघर्षों से होकर गुजरी है।
आज जब राजस्थान की राजनीति में डॉ. किरोड़ी लाल मीणा का नाम लिया जाता है, तो उनके समर्थक उन्हें प्यार से “बाबा” कहकर पुकारते हैं। लेकिन इस मुकाम तक पहुंचने की कहानी कई दशकों की मेहनत, राजनीतिक संघर्ष और लगातार सक्रिय जनजीवन की कहानी है।
किसान परिवार से शुरू हुई कहानी
डॉ. किरोड़ी लाल मीणा का जन्म 3 नवंबर 1951 को राजस्थान के दौसा जिले के खोहरा मुल्ला गांव में एक किसान परिवार में हुआ। ग्रामीण परिवेश में पले-बढ़े किरोड़ी लाल ने शुरुआती जीवन में गांव, खेती-किसानी और आम ग्रामीण परिवारों की चुनौतियों को करीब से देखा।
उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ते हुए सरदार पटेल मेडिकल कॉलेज, बीकानेर से MBBS की पढ़ाई पूरी की। पढ़ाई के बाद उन्होंने करीब दो वर्ष तक चिकित्सा का अभ्यास भी किया। लेकिन उनके भीतर समाज और सार्वजनिक जीवन के लिए काम करने की इच्छा लगातार मजबूत होती गई।
यहीं से डॉक्टर किरोड़ी लाल मीणा के जीवन का वह मोड़ आया, जिसने आगे चलकर उन्हें राजस्थान की राजनीति का चर्चित चेहरा बना दिया।
डॉक्टर से संगठन के कार्यकर्ता तक
चिकित्सा के पेशे से जुड़े होने के बावजूद उनका झुकाव सार्वजनिक जीवन की ओर बढ़ता गया। वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े और धीरे-धीरे राजनीतिक संगठन में सक्रिय भूमिका निभाने लगे।
साल 1981 में उन्हें सवाई माधोपुर भाजपा संगठन का जिला अध्यक्ष बनाया गया। इसके बाद 1986 में भारतीय जनता युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी मिली। यह वह दौर था जब राजस्थान की राजनीति में उनका नाम तेजी से उभरना शुरू हुआ।
किसी भी बड़े राजनीतिक पद से पहले संगठन के कार्यकर्ता के रूप में जमीन पर काम करने का यह दौर उनकी राजनीतिक शैली को समझने के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
1985: विधानसभा की पहली सीढ़ी
डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने 1985 में पहली बार राजस्थान विधानसभा का चुनाव जीता। यहीं से उनका विधायी राजनीति का सफर शुरू हुआ।
इसके बाद वे अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों से राजस्थान की राजनीति में सक्रिय रहे। 1998 में बामनवास, 2003 में सवाई माधोपुर, 2008 में टोडाभीम और 2013 में लालसोट से विधानसभा पहुंचे। वर्ष 2023 में उन्होंने एक बार फिर सवाई माधोपुर से विधायक के रूप में विधानसभा में वापसी की।
इस लंबी यात्रा में एक बात लगातार दिखाई देती है—किरोड़ी लाल मीणा ने राजनीति को केवल एक चुनाव या एक पद के रूप में नहीं देखा, बल्कि लगातार सक्रिय रहने वाली सार्वजनिक भूमिका के रूप में आगे बढ़ाया।
विधानसभा से संसद तक
राज्य की राजनीति में पहचान बनाने के बाद उनका राजनीतिक सफर संसद तक पहुंचा।
1989 में वे सवाई माधोपुर से लोकसभा के लिए निर्वाचित हुए। इसके करीब दो दशक बाद 2009 में दौसा से लोकसभा सांसद बने।
2009 का दौर उनके राजनीतिक जीवन में विशेष महत्व रखता है। दौसा से लोकसभा पहुंचने के साथ उन्होंने राष्ट्रीय राजनीति में एक बार फिर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
इसके बाद वर्ष 2018 में वे राजस्थान से राज्यसभा सांसद बने और दिसंबर 2023 तक उच्च सदन में रहे।
इस तरह उनका राजनीतिक अनुभव ग्राम और संगठन की राजनीति से लेकर विधानसभा, लोकसभा और राज्यसभा तक फैला हुआ है।
मंत्री बनने की पहली बड़ी जिम्मेदारी
राजस्थान की राजनीति में उनका एक महत्वपूर्ण अध्याय 2003 से 2008 के बीच आया, जब वे तत्कालीन वसुंधरा राजे सरकार में खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री रहे। राजस्थान सरकार के जिला गजेटियर में भी उनके इस कार्यकाल और राजनीतिक अनुभव का उल्लेख मिलता है।
यह वह समय था जब उन्होंने सरकार में रहते हुए प्रशासनिक जिम्मेदारियों का अनुभव हासिल किया और राजनीति में उनका कद और बढ़ा।
लेकिन उनकी राजनीतिक यात्रा हमेशा एक ही पार्टी और एक ही रास्ते पर नहीं चली।
भाजपा से दूरी और फिर वापसी
डॉ. किरोड़ी लाल मीणा के राजनीतिक जीवन का एक दिलचस्प पक्ष यह भी रहा कि 2008 में उन्होंने भाजपा छोड़ दी। इसके बाद वे 2013 में नेशनल पीपल्स पार्टी (NPP) से जुड़े और लालसोट से विधानसभा चुनाव जीतकर फिर विधानसभा पहुंचे।
इसके बाद वर्ष 2018 में उन्होंने भाजपा में वापसी की और उसी वर्ष राजस्थान से राज्यसभा भेजे गए।
राजनीतिक जीवन का यह अध्याय बताता है कि उनकी यात्रा हमेशा सीधी रेखा में नहीं रही। इसमें राजनीतिक मतभेद, अलग रास्ते, चुनावी संघर्ष और फिर वापसी—सब कुछ शामिल रहा।
2023: सवाई माधोपुर से फिर विधानसभा में वापसी
राजनीति के लंबे सफर के बाद वर्ष 2023 में डॉ. किरोड़ी लाल मीणा सवाई माधोपुर से विधायक चुने गए और 6 दिसंबर 2023 को विधानसभा सदस्य के रूप में पदभार ग्रहण किया।
इसके कुछ ही सप्ताह बाद 30 दिसंबर 2023 को उन्हें राजस्थान सरकार में कैबिनेट मंत्री बनाया गया।
आज भी राजस्थान सरकार की आधिकारिक विभागीय वेबसाइटें उन्हें कैबिनेट मंत्री के रूप में सूचीबद्ध करती हैं। अगस्त 2026 में केंद्र सरकार की कृषि संबंधी बैठक में भी राजस्थान के कृषि मंत्री के रूप में उनकी भागीदारी दर्ज हुई है।
“बाबा” की पहचान कैसे बनी?
राजनीति में डॉ. किरोड़ी लाल मीणा की पहचान केवल उनके पदों से नहीं बनी। उनकी राजनीतिक शैली, ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में सक्रियता तथा समर्थकों के बीच उनकी लोकप्रियता ने उन्हें अलग पहचान दी।
पूर्वी राजस्थान की राजनीति में उनका प्रभाव विशेष रूप से दिखाई देता है। लंबे समय तक चुनावी मैदान में सक्रिय रहने और लगातार जनता के बीच रहने के कारण समर्थकों के बीच वे “बाबा” नाम से लोकप्रिय हुए।
उनकी राजनीति में सड़क से लेकर विधानसभा और संसद तक संघर्ष करने की शैली दिखाई देती रही है। यही कारण है कि उनके समर्थक उनके राजनीतिक जीवन को केवल पदों की सूची नहीं, बल्कि संघर्ष और जनसंपर्क की यात्रा के रूप में देखते हैं।
डॉक्टर की पढ़ाई से किसान और ग्रामीण राजनीति तक
डॉ. किरोड़ी लाल मीणा की कहानी का सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि उन्होंने डॉक्टर की पढ़ाई की, चिकित्सा का पेशा अपनाया और फिर सक्रिय राजनीति में आए।
आज उनके राजनीतिक कार्यक्षेत्र में कृषि, ग्रामीण विकास और किसानों से जुड़े मुद्दे महत्वपूर्ण विषय हैं। राजस्थान सरकार की वर्तमान विभागीय जानकारी में उन्हें कृषि एवं उद्यानिकी तथा ग्रामीण विकास सहित कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों से जोड़ा गया है।
13 अगस्त 2026 को केंद्र सरकार द्वारा राजस्थान के लिए कृषि योजनाओं के अंतर्गत 340.59 करोड़ रुपये की स्वीकृति से जुड़ी बैठक में भी राजस्थान के कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा शामिल रहे।
यह उनके जीवन के उस सफर का एक दिलचस्प पड़ाव है, जो कभी एक किसान परिवार के गांव से शुरू हुआ था।
चार दशक से ज्यादा लंबा सार्वजनिक जीवन
डॉ. किरोड़ी लाल मीणा की राजनीति को अगर एक समयरेखा में देखें तो तस्वीर काफी बड़ी दिखाई देती है—
- 1951 — दौसा जिले के खोहरा मुल्ला गांव में जन्म।
- 1981 — सवाई माधोपुर भाजपा के जिला अध्यक्ष।
- 1985 — पहली बार राजस्थान विधानसभा के सदस्य बने।
- 1986 — भारतीय जनता युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष।
- 1989 — पहली बार लोकसभा पहुंचे।
- 2003–2008 — राजस्थान सरकार में कैबिनेट मंत्री।
- 2009 — दौसा से लोकसभा सांसद निर्वाचित।
- 2013 — लालसोट से विधानसभा चुनाव जीता।
- 2018 — भाजपा में वापसी और राज्यसभा सदस्य बने।
- 2023 — सवाई माधोपुर से फिर विधायक निर्वाचित।
- 30 दिसंबर 2023 — राजस्थान सरकार में कैबिनेट मंत्री बने।
- 2026 — राजस्थान सरकार में मंत्री के रूप में कृषि और ग्रामीण विकास से जुड़े दायित्वों में सक्रिय।
एक राजनीतिक सफर, जिसमें कई मोड़ आए
किरोड़ी लाल मीणा का जीवन उन राजनीतिक यात्राओं में गिना जा सकता है, जिनमें एक ही व्यक्ति ने अलग-अलग भूमिकाएं निभाईं—डॉक्टर, संगठन कार्यकर्ता, विधायक, मंत्री, लोकसभा सांसद, राज्यसभा सांसद और फिर कैबिनेट मंत्री।
उनके सफर में जीत के साथ हार, सत्ता के साथ विपक्ष, पार्टी के साथ दूरी और फिर वापसी जैसे कई मोड़ आए। यही उतार-चढ़ाव उनके राजनीतिक जीवन को सामान्य राजनीतिक बायोग्राफी से अलग बनाते हैं।
आज राजस्थान की राजनीति में डॉ. किरोड़ी लाल मीणा एक लंबे राजनीतिक अनुभव वाले नेता के रूप में मौजूद हैं। गांव की गलियों से शुरू हुई उनकी यात्रा विधानसभा और संसद के गलियारों से होते हुए आज राजस्थान सरकार की जिम्मेदारियों तक पहुंच चुकी है।
एक किसान परिवार का बेटा, जिसने डॉक्टर बनने का सपना पूरा किया; डॉक्टर जिसने राजनीति को अपना रास्ता बनाया; और राजनेता जिसने चार दशक से अधिक समय तक राजस्थान के सार्वजनिक जीवन में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई—यही है डॉ. किरोड़ी लाल मीणा की कहानी।
निष्कर्ष
किरोड़ी लाल मीणा का जीवन यह बताता है कि राजनीति केवल चुनाव जीतने का नाम नहीं है। यह लंबी यात्रा है—संगठन में काम करने की, जनता के बीच रहने की, संघर्ष करने की और समय के साथ अपनी राजनीतिक भूमिका बदलने की।
उनकी कहानी में राजस्थान के ग्रामीण समाज, पूर्वी राजस्थान की राजनीति और राज्य की बदलती राजनीतिक परिस्थितियों की झलक भी दिखाई देती है।
खोहरा मुल्ला के एक किसान परिवार से शुरू हुआ सफर आज राजस्थान की सत्ता के महत्वपूर्ण गलियारों तक पहुंच चुका है—और इस सफर के पन्ने अभी लिखे जा रहे हैं।

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